वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दक्षिणी तटीय इलाकों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई और मिसाइल हमले किए हैं।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप के आसपास जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ये इलाके होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब हैं, जिसके कारण इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
ट्रंप ने दी ईरान को बड़ी धमकी
हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़ी चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने की कोशिश की, तो उसे इससे भी बड़ा सैन्य हमला झेलना पड़ सकता है। उन्होंने ईरान की मौजूदा सैन्य और आर्थिक स्थिति को भी बेहद कमजोर बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना मुख्य मुद्दा
अमेरिका का कहना है कि ईरानी सैन्य गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को खतरा पैदा हो रहा था। इसी वजह से अमेरिकी कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान की रडार और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना बताया जा रहा है।
इससे पहले 30 अगस्त को अमेरिका ने लराक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया था। इसके बाद ईरान ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे थे।
ईरान ने दिया बातचीत का संकेत
तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने युद्धविराम की संभावना का संकेत दिया है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका पहले हुए समझौते की शर्तों का ईमानदारी से पालन करता है, तो ईरान भी अपनी प्रतिबद्धताओं पर लौटने के लिए तैयार है।
दुनिया पर पड़ेगा सीधा असर
इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा असर तेल और वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां सैन्य टकराव बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी, जहाजों की आवाजाही में बाधा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अमेरिका और ईरान के बीच यह संघर्ष सीमित रहेगा, या फिर पूरा मध्य पूर्व एक बड़े युद्ध की चपेट में आ जाएगा?
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