नई दिल्ली। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ की कथित गुप्त रूस यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूसी अधिकारियों से मुलाकात की है। हालांकि, इस यात्रा को लेकर अमेरिका की ओर से अब तक विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मामला तब और रहस्यमय हो गया, जब अमेरिकी सैन्य विमान C-17 Globemaster III की गतिविधियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि 23 अगस्त को यह विमान अमेरिका के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज से उड़कर लातविया की राजधानी रीगा पहुंचा और करीब दो दिन वहां रुका। इसके बाद 25 अगस्त को यही विमान मॉस्को के व्नुकोवो हवाई अड्डे पर उतरा।
रीगा में विमान के दो दिन रुकने और उसमें कौन सवार था, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसी वजह से सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज सैन्य आवाजाही थी या इसके पीछे कोई संवेदनशील राजनयिक अथवा खुफिया मिशन था।
यूक्रेन से हमले रोकने का अनुरोध?
रिपोर्ट के अनुसार, रैटक्लिफ की यात्रा से पहले अमेरिका ने यूक्रेन से मॉस्को और उत्तरी रूस के कुछ शहरों पर ड्रोन व मिसाइल हमले कुछ समय के लिए रोकने का अनुरोध किया था। बताया गया कि कीव को अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी की रूस यात्रा की जानकारी दी गई थी। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत और संभावित समझौते की कोशिशों में जुटा है।
लातविया ने दी विमान को उड़ान की मंजूरी
लातविया के रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने CNN को बताया कि अमेरिकी विमान को उनके हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति थी और उड़ान का बेहतर समन्वय किया गया था। हालांकि, विमान के मिशन और उसमें मौजूद लोगों को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
रूस-ईरान संबंध भी चर्चा में
रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका ईरान को लेकर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। रूस और ईरान के बीच रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को देखते हुए भी इस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
NATO को लेकर भी चिंता
रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया आकलन का हवाला देते हुए यह भी दावा किया गया है कि रूस आने वाले वर्षों में NATO के किसी सदस्य देश के खिलाफ सीमित कार्रवाई कर सकता है। संभावित परिस्थितियों में साइबर हमले, गुप्त अभियान और सीमित सैन्य घुसपैठ जैसी गतिविधियों का जिक्र किया गया है।
सीआईए पहले भी अमेरिका-रूस के बीच कैदियों की अदला-बदली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है। ऐसे में रैटक्लिफ की कथित मॉस्को यात्रा को लेकर यह अटकलें तेज हैं कि इसके पीछे यूक्रेन युद्ध, कैदी रिहाई, अमेरिका-रूस संबंधों या किसी अन्य संवेदनशील मुद्दे पर पर्दे के पीछे बातचीत हो सकती है। हालांकि, यात्रा के वास्तविक उद्देश्य की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
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