नई दिल्ली। देश के हवाई अड्डों और नागरिक उड्डयन क्षेत्र को बढ़ते साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बड़ा कदम उठाया है। हवाई अड्डों की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ जवानों को अब पारंपरिक सुरक्षा के साथ-साथ साइबर खतरों से निपटने के लिए भी विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए सीआईएसएफ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रोपड़ के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है।

इस साझेदारी के तहत सीआईएसएफ जवानों को छह सप्ताह का विशेष आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बल में एक विशेष ‘साइबर कमांडो’ कैडर तैयार किया जाएगा। ये जवान हवाई अड्डों पर साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों की पहचान करने, संभावित हमलों से निपटने और साइबर घटनाओं के बाद सिस्टम को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

हवाई अड्डों की सुरक्षा में साइबर कमांडो क्यों जरूरी?

आज के दौर में हवाई अड्डे सिर्फ यात्रियों के आने-जाने की जगह नहीं हैं, बल्कि अत्याधुनिक डिजिटल और तकनीकी प्रणालियों पर निर्भर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं। एयर ट्रैफिक से लेकर टिकटिंग, चेक-इन, बैगेज हैंडलिंग, एक्सेस कंट्रोल, निगरानी और कई अन्य व्यवस्थाओं में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में किसी भी साइबर हमले या डिजिटल सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी का असर केवल कंप्यूटर नेटवर्क तक सीमित नहीं रह सकता। इससे एयरपोर्ट का संचालन प्रभावित हो सकता है और यात्रियों की सुरक्षा, सेवाओं तथा पूरे विमानन नेटवर्क पर असर पड़ सकता है।इसी चुनौती को देखते हुए सीआईएसएफ अब अपने जवानों को साइबर सुरक्षा की विशेष ट्रेनिंग देने जा रहा है, ताकि सुरक्षा बल किसी भी संभावित साइबर खतरे का तेजी से पता लगाकर उससे प्रभावी ढंग से निपट सके।

IIT रोपड़ के IT विशेषज्ञ देंगे छह सप्ताह की ट्रेनिंग

सीआईएसएफ और आईआईटी रोपड़ के बीच हुए समझौते के तहत जवानों के लिए छह सप्ताह का निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में जवानों को साइबर सुरक्षा का सैद्धांतिक ज्ञान देने के साथ-साथ वास्तविक परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। आईआईटी रोपड़ से जुड़े आईटी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ जवानों को आधुनिक साइबर खतरों की पहचान और उनसे बचाव के तरीके समझाएंगे। ट्रेनिंग का उद्देश्य ऐसे सुरक्षा कर्मियों को तैयार करना है जो जरूरत पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभा सकें।

प्रशिक्षण में किन विषयों पर दिया जाएगा जोर?

छह सप्ताह के विशेष पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। जवानों को डिजिटल दुनिया में मौजूद खतरों और उनसे निपटने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षण के प्रमुख विषयों में शामिल हैं:

  • साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांत
  • महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा
  • डिजिटल फोरेंसिक
  • साइबर घटनाओं की पहचान और जांच
  • घटना प्रतिक्रिया यानी Incident Response
  • आपदा रिकवरी और सिस्टम की बहाली
  • बिजनेस कंटिन्यूटी यानी कामकाज को जारी रखने की रणनीति
  • नए और उभरते साइबर खतरे
  • मल्टी-सेक्टर क्राइसिस सिमुलेशन

इस प्रशिक्षण के जरिए जवानों को संभावित साइबर हमले की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार किया जाएगा।

डिजिटल फोरेंसिक से लेकर घटना प्रतिक्रिया तक मिलेगी ट्रेनिंग

साइबर हमले के बाद सिर्फ सिस्टम को दोबारा चालू करना ही पर्याप्त नहीं होता। यह पता लगाना भी जरूरी होता है कि हमला कैसे हुआ, किस सिस्टम को निशाना बनाया गया और हमलावर ने किस तरह की गतिविधि की। इसी वजह से प्रशिक्षण में डिजिटल फोरेंसिक को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके तहत साइबर घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को समझने और उनकी जांच करने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसके अलावा जवानों को Incident Response यानी साइबर घटना होने के बाद तत्काल प्रतिक्रिया देने की प्रक्रिया भी सिखाई जाएगी। इसका उद्देश्य साइबर हमले से होने वाले नुकसान को कम से कम करना और प्रभावित सिस्टम को जल्द से जल्द सुरक्षित करना है।

आपदा के बाद सिस्टम को बहाल करने पर भी जोर

साइबर हमले की स्थिति में किसी एयरपोर्ट की डिजिटल व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित न हो, इसके लिए Disaster Recovery और Business Continuity भी प्रशिक्षण का अहम हिस्सा होगा। जवानों को यह समझाया जाएगा कि किसी बड़े तकनीकी व्यवधान के दौरान महत्वपूर्ण सेवाओं को कैसे जारी रखा जा सकता है और साइबर घटना के बाद सिस्टम को सुरक्षित तरीके से कैसे बहाल किया जा सकता है। हवाई अड्डों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए यह क्षमता बेहद अहम है, क्योंकि यहां लंबे समय तक डिजिटल सेवाओं के बाधित रहने से बड़े स्तर पर परिचालन संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

CISF में तैयार होगा विशेष ‘साइबर कमांडो’ कैडर

इस पूरी पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा साइबर कमांडो कैडर तैयार करना है। इसका उद्देश्य ऐसे विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों की टीम बनाना है जो सुरक्षा के पारंपरिक कार्यों के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को भी समझ सकें। ये साइबर कमांडो एयरपोर्ट पर संभावित साइबर खतरों की पहचान करने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और साइबर घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई में मदद करेंगे। इससे सीआईएसएफ की सुरक्षा व्यवस्था को एक नया तकनीकी आयाम मिलेगा।

प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय के विजन से जुड़ी पहल

सीआईएसएफ के मुताबिक, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन-2024 में रखे गए विजन और केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशों के अनुरूप है। इन निर्देशों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस संगठनों के भीतर एक समर्पित ‘साइबर कमांडो’ कैडर विकसित करने पर जोर दिया गया था। अब सीआईएसएफ ने इस दिशा में एयरपोर्ट सेक्टर के लिए विशेष पहल शुरू की है। इससे बल को साइबर सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।

CISF महानिदेशक के नेतृत्व में तैयारी

सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन के नेतृत्व में बल ने उभरते साइबर खतरों से निपटने के लिए विशेष क्षमता विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है। सीआईएसएफ देश के कई महत्वपूर्ण हवाई अड्डों की सुरक्षा में तैनात है। ऐसे में एयरपोर्ट सेक्टर की साइबर सुरक्षा को मजबूत करना बल की जिम्मेदारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

IIT रोपड़ के साथ हुआ महत्वपूर्ण समझौता

सीआईएसएफ और आईआईटी रोपड़ के बीच हुए इस समझौते पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और सीआईएसएफ नई दिल्ली के आईजी/एयरपोर्ट सेक्टर-I सेंथिल अवुडई कृष्णा राज एस (आईपीएस) ने हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी के जरिए तकनीकी शिक्षा और सुरक्षा विशेषज्ञता को एक साथ लाने की कोशिश की गई है। आईआईटी रोपड़ के विशेषज्ञ साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में जवानों को आधुनिक तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढांचे को भी मिलेगी मजबूती

सीआईएसएफ और आईआईटी रोपड़ की यह साझेदारी केवल एयरपोर्ट सुरक्षा तक सीमित नहीं मानी जा रही है। साइबर खतरों की प्रकृति लगातार बदल रही है और महत्वपूर्ण सरकारी तथा निजी संस्थान डिजिटल सिस्टम पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों के भीतर साइबर विशेषज्ञता विकसित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। सीआईएसएफ का यह विशेष कैडर भविष्य में देश के व्यापक साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

क्या बदलेगा साइबर कमांडो आने के बाद?

साइबर कमांडो की तैनाती से एयरपोर्ट सुरक्षा में तकनीकी क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। किसी संदिग्ध साइबर गतिविधि की पहचान होने पर प्रशिक्षित जवान शुरुआती स्तर पर स्थिति को समझने और तत्काल प्रतिक्रिया देने में सक्षम होंगे। इससे संभावित साइबर हमले के प्रभाव को कम करने, महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।