नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में H1N1 (इन्फ्लुएंजा-ए) के बढ़ते मामलों के बीच कोविड-19 की निगरानी भी तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था के तहत इन्फ्लुएंजा लाइक इलनेस (ILI) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (SARI) से पीड़ित मरीजों पर विशेष नजर रखी जा रही है। अस्पतालों को कोविड जांच और संबंधित आंकड़ों की नियमित रिपोर्टिंग पर जोर देने के निर्देश दिए गए हैं।
H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच कोविड पर भी नजर
दिल्ली में मौसमी श्वसन संक्रमणों के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है। इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के तहत ILI और SARI मरीजों की जानकारी इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफार्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर दर्ज की जाती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कोविड-19 समेत अन्य श्वसन संक्रमणों में होने वाली असामान्य बढ़ोतरी का समय रहते पता लगाना है।
SARI मरीजों की कोविड जांच पर जोर
स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व निर्देशों के अनुसार अस्पतालों में भर्ती सभी SARI मरीजों की कोविड जांच करने और ILI के चुनिंदा मामलों के नमूनों की जांच करने का प्रावधान है। इसके साथ ही कोविड से संबंधित आंकड़ों को IDSP-IHIP पर नियमित रूप से रिपोर्ट करने को कहा गया था।
H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच अब अस्पतालों में इन दिशा-निर्देशों के पालन और रिपोर्टिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कोविड और H1N1 के लक्षणों में समानता
कोविड-19 और H1N1 दोनों श्वसन संक्रमण हैं। इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि मरीज किस संक्रमण से प्रभावित है।
गंभीर मामलों में संक्रमण की सही पहचान के लिए प्रयोगशाला जांच महत्वपूर्ण होती है।
एक नमूने से कई संक्रमणों की पहचान संभव
कोविड और H1N1 की जांच के लिए आमतौर पर नाक या गले से श्वसन नमूना लिया जाता है। आरटी-पीसीआर आधारित आणविक जांच के जरिए संबंधित वायरस की पहचान की जाती है। मल्टीप्लेक्स आरटी-पीसीआर जांच में एक ही नमूने से इन्फ्लुएंजा ए, इन्फ्लुएंजा बी और SARS-CoV-2 की पहचान भी संभव हो सकती है।
अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की तैयारी
गंभीर श्वसन संक्रमण वाले मरीजों के उपचार के लिए अस्पतालों को ऑक्सीजन और अन्य जरूरी श्वसन सहायता की उपलब्धता बनाए रखने पर ध्यान देना होगा। गंभीर स्थिति में मरीजों को वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है।
अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति को देखते हुए जांच और उपचार से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी तैयार रखने पर जोर है।
मामलों में असामान्य बढ़ोतरी पर RRT करेगी जांच
IDSP के तहत यदि किसी क्षेत्र में श्वसन संक्रमण के मामलों में असामान्य वृद्धि सामने आती है तो जिला और राज्य स्तर की निगरानी इकाइयां इसकी समीक्षा करती हैं। जरूरत पड़ने पर रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) को जांच के लिए भेजा जा सकता है।
कोविड की नई लहर का संकेत नहीं
दिल्ली में कोविड निगरानी बढ़ाए जाने का मतलब यह नहीं है कि राजधानी में कोविड की नई लहर आ गई है। निगरानी का मुख्य उद्देश्य H1N1, कोविड-19 और अन्य श्वसन संक्रमणों में होने वाली असामान्य वृद्धि का समय रहते पता लगाना और मरीजों के उपचार की तैयारी बनाए रखना है।
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