काठमांडू। नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, फ्लैश फ्लड में अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
तीन दिन में फिर आ सकती है बड़ी बाढ़
सबसे बड़ी चिंता अब संभावित दूसरी बाढ़ को लेकर है। नेपाल-चीन सीमा के पास मलबे और भूस्खलन के कारण नदियों का प्रवाह बाधित हुआ है और एक बैरियर झील बन गई है। चीन ने चेतावनी दी है कि आने वाले तीन दिनों में झील में पानी तेजी से बढ़ सकता है, जिससे उसके टूटने पर निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है और अगले तीन दिनों में इसमें लगभग 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी पहुंचने का अनुमान है। चीनी अधिकारी लगातार झील की निगरानी कर रहे हैं और संभावित खतरे को कम करने के लिए रियल-टाइम आकलन कर रहे हैं।
हजारों लोग लापता, कई देशों के नागरिक शामिल
इस आपदा के बाद नेपाल और तिब्बत में 1,400 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और कई अन्य देशों के नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर और मलबे से आई अचानक बाढ़ ने घरों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
भारत के लिए भी चिंता
आपदा के बाद बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की खबर सामने आई है। भारतीय अधिकारियों ने लापता नागरिकों का पता लगाने के लिए नेपाल और स्थानीय प्रशासन के साथ संपर्क बढ़ाया है। नेपाल से बहकर आने वाली नदियों को लेकर भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
फिलहाल नेपाल और चीन दोनों की नजर बैरियर झील और नदियों के जलस्तर पर है। पहले से तबाह इलाकों में दूसरी बाढ़ का खतरा राहत अभियान के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
Comments (0)