लद्दाख के उपशी में बिना सीमेंट के तैयार हुआ अनूठा ढांचा, करीब 4 करोड़ लीटर पानी का भंडारण; 36 और चेक डैम का है प्रस्ताव
लेह (लद्दाख)। सिंधु नदी के पानी के बेहतर उपयोग और लद्दाख के किसानों की सिंचाई समस्या दूर करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। लेह जिले के उपशी में सिंधु नदी पर देश का अपनी तरह का पहला रॉक चेक डैम तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में सीमेंट-कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि नदी और आसपास से जुटाई गई विशाल प्राकृतिक चट्टानों को आपस में जोड़कर संरचना तैयार की गई है। परियोजना का नाम ‘सिंधु जल समृद्धि अभियान’ रखा गया है।
करीब 200 फीट लंबे इस रॉक चेक डैम को लगभग 180 मीट्रिक टन चट्टानों से तैयार किया गया। चट्टानों का वजन करीब 500 किलोग्राम से 10 मीट्रिक टन तक है। इसे महज सात दिनों में तैयार किया गया था। डैम के कारण नदी में करीब 500 मीटर तक जलभराव क्षेत्र बना और लगभग चार करोड़ लीटर पानी का भंडारण संभव हुआ। नदी के मध्य हिस्से में पानी की गहराई करीब 10 फीट तक पहुंची।
इस परियोजना का सीधा लाभ लद्दाख के किसानों को मिल रहा है। सिंधु नदी कई स्थानों पर इतनी नीचे और उथले प्रवाह में बहती है कि खेती के लिए मोटर और पंप से पर्याप्त पानी उठाना मुश्किल होता था। रॉक चेक डैम पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर जलस्तर बढ़ाता है, जिससे सिंचाई नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाना आसान हो जाता है। उपशी परियोजना से इगू-फे सिंचाई नहर को भी लाभ मिल रहा है।
इस पहल का महत्व अब और बढ़ गया है। लद्दाख प्रशासन ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को 36 अतिरिक्त चेक डैम परियोजनाओं का प्रस्ताव भेजा है। इनमें लेह क्षेत्र में सात हिमालयन रॉक चेक डैम और करगिल क्षेत्र में 29 आरसीसी चेक डैम/वियर प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं पर अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक है और प्रशासन के मुताबिक इनके जरिए 18,600 एकड़ से अधिक क्षेत्र की सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
सिंधु जल संधि को भारत द्वारा स्थगित रखे जाने की मौजूदा स्थिति के बीच इस परियोजना को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इसका प्रत्यक्ष उद्देश्य लद्दाख में जल संरक्षण, सिंचाई और कृषि को मजबूत करना है, लेकिन सिंधु नदी के पानी का भारतीय क्षेत्र में अधिक प्रभावी उपयोग इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बनाता है।
उपशी का रॉक चेक डैम इसलिए भी खास है कि यह भारी कंक्रीट संरचना के बजाय स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित अपेक्षाकृत पर्यावरण-अनुकूल मॉडल है। सफल प्रयोग के बाद लद्दाख में ऐसे कई और ढांचों की योजना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में सिंधु और अन्य नदियों के पानी को स्थानीय कृषि और जल सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर उपयोग करने की तैयारी है।
Comments (0)