नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में शिव मंदिर के पास एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और चारों तरफ धूल का गुबार फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, इमारत गिरने के कुछ ही पलों में पूरा ढांचा मलबे में तब्दील हो गया।
चश्मदीदों ने बताया कि हादसा अचानक हुआ और आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने मलबे के अंदर बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका जताई है। हालांकि, मलबे में कितने लोग फंसे हैं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि इस इमारत में पीजी संचालित था। सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण यहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। इसी वजह से हादसे के बाद छात्रों के भी अंदर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
सूचना मिलते ही पहुंचीं राहत-बचाव टीमें
फायर डिपार्टमेंट को दोपहर करीब 1:33 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके बाद दमकल की करीब 12 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। पुलिस, एमसीडी और अन्य राहत-बचाव दलों ने मोर्चा संभाल लिया है। मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास लगातार जारी है।
मलबे के नीचे से फोन आने की जानकारी
मौके पर पहुंचे आरके पुरम के विधायक अनिल कुमार शर्मा के मुताबिक, कुछ लोगों के मलबे के नीचे से फोन करने की जानकारी मिली है। इससे राहत-बचाव अभियान में तेजी लाई गई है। स्थानीय लोग भी बचाव दलों के साथ मलबा हटाने में सहयोग कर रहे हैं।
छात्रों के फंसे होने की सूचना, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
NSUI ने भी घटना को लेकर चिंता जताई है। संगठन की ओर से सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास हुई इस घटना में कुछ छात्रों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। संगठन ने राहत-बचाव अभियान तेज करने और हादसे की जांच की मांग की है।
फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का मुख्य ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए हैं और कितने लोग मलबे में फंसे हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी राहत-बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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