नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत दी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के साथ असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज प्रदर्शनकारियों से संबंधित एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिली है। वहीं, 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ नए सिरे से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई है, जिनके बारे में केंद्र सरकार की ओर से आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब प्रदर्शन से जुड़े मामले खत्म किए जा रहे हैं तो इन 2873 लोगों के खिलाफ अलग से कार्रवाई क्यों होगी।
दिल्ली समेत पांच राज्यों में FIR रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दिल्ली के अलावा असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया। ये मामले 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित बताए गए हैं।
दिल्ली पुलिस और संबंधित चार राज्य सरकारों की ओर से भी अदालत के समक्ष इन मामलों को अनुच्छेद 142 के तहत समाप्त करने का अनुरोध किया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया।
प्रदर्शनकारियों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे का मुद्दा भी सामने आया। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासन पर कायम है।
केंद्र ने कहा कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र ने तीन महीने का समय मांगा है। मुआवजे की प्रक्रिया और राशि को लेकर संबंधित राज्य सरकारों तथा अन्य पक्षों के साथ बातचीत की जाएगी।
2873 लोगों पर नई FIR की अनुमति क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े छात्रों को राहत देने के साथ ही केंद्र को 2873 लोगों के खिलाफ नए सिरे से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी दी है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इन लोगों का आपराधिक इतिहास बताया गया है।
सुनवाई के दौरान वकील हरिहरन ने 2873 लोगों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन लोगों के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई प्रस्तावित है।
इससे साफ है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों को बिना शर्त राहत देने के बजाय उन लोगों को अलग रखने पर केंद्रित है, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक पृष्ठभूमि होने का दावा किया गया है।
पांच सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीजेपी ने पांच सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए मार्च वापस लिया जा रहा है।
अदालत ने सौरव दास के बयान को भी दर्ज किया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दोनों पक्षों से आपसी भरोसे के साथ बातचीत जारी रखने की बात कही। अदालत ने कहा कि खुले दिमाग से बातचीत की जाए तो मुश्किल मुद्दों का समाधान भी बातचीत के जरिए निकाला जा सकता है।
सरकार और प्रदर्शनकारी बातचीत को तैयार
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से कहा गया कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं और बातचीत के जरिए समाधान तलाशा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों पक्षों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण बताया। अदालत के आदेश के बाद फिलहाल उन राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर को लेकर राहत मिल गई है, जिन मामलों का जिक्र सुनवाई में किया गया था।
छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम
नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शन के बाद कई छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और एफआईआर दर्ज किए जाने का मामला सामने आया था। इसको लेकर प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से अदालत का रुख किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दिल्ली और चार राज्यों में प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर रद्द होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, 2873 लोगों के खिलाफ कथित आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर संभावित नई कार्रवाई का मामला अलग रहेगा।
क्या है पूरे मामले का सार?
- सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया।
- दिल्ली के अलावा असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार के मामले शामिल हैं।
- प्रदर्शन से जुड़े मामले 20 से 25 जुलाई के बीच के बताए गए हैं।
- आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजे का आश्वासन दिया गया है।
- केंद्र ने मुआवजे की प्रक्रिया के लिए तीन महीने का समय मांगा है।
- कथित आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2873 लोगों पर नई एफआईआर की अनुमति दी गई है।
- सीजेपी ने पांच सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस ले लिया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकालने पर जोर दिया है।
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