नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने में कामयाबी हासिल की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने परामर्श समिति की बैठक में सांसदों को बताया कि मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत में तेल-गैस की आपूर्ति बाधित नहीं हुई और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया-उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के साथ बेहद महत्वपूर्ण संबंध हैं। मौजूदा संकट के दौरान सरकार का मुख्य फोकस भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने पर रहा।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत की रणनीति

बैठक में सांसदों ने पश्चिम एशिया के युद्ध और भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर सवाल उठाए। जयशंकर ने बताया कि संकट के बावजूद भारत लगातार ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता ला रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भरता कम हो।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपने ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखने के लिए पश्चिम एशिया में अपने राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत किया है।

अमेरिका और ईरान दोनों से रिश्ते

जयशंकर ने बैठक में भारत की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक स्थिति का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, भारत उन चुनिंदा देशों में है जिनके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं।

युद्ध और तनाव के बीच यह संतुलन भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में ईरान से तेल और अन्य सामान की खरीद तथा संघर्ष के बाद लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी चर्चा हुई।

खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं। बैठक में इन भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार ने संकट की स्थिति में उनकी सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

मक्का समझौते पर भी उठे सवाल

बैठक में कुछ सांसदों ने मक्का रक्षा समझौते को लेकर चिंता जताई और भारत का रुख जानना चाहा।

7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने इस रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत समझौते में शामिल किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस समझौते को लेकर भारत की रणनीति पर भी सांसदों ने विदेश मंत्री से सवाल किए।

भारत की कूटनीति की परीक्षा

जयशंकर के मुताबिक, मौजूदा संकट में भारत की प्राथमिकता स्पष्ट है—राष्ट्रीय हितों की रक्षा, ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

यही वजह है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद भारत ने अब तक ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों के मोर्चे पर बड़े व्यवधान से खुद को बचाए रखा है।