नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में देशवासियों से संवाद करते हुए युवाओं, महिला सशक्तीकरण, नशामुक्ति, स्वच्छता, स्वदेशी उत्पादों, इतिहास, विज्ञान, कृषि और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों में छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव ला रहे लोगों की कहानियों को सामने रखते हुए देशवासियों से ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को नशे से बचाने पर विशेष जोर देते हुए नशामुक्त भारत और मजबूत युवा भविष्य का संदेश दिया। उन्होंने नशे के खिलाफ समाज की सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया और युवाओं को इससे दूर रखने के प्रयासों को जनआंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया।

इतिहास को रोचक बनाने वाले प्रयास की सराहना

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने मुंबई के कृष्णा शेषाद्रि के एक अनूठे प्रयास का उल्लेख किया। उन्होंने ऐसी वेबसाइट तैयार की है, जिसके माध्यम से किसी वर्ष का चयन कर यह जाना जा सकता है कि उस समय भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में किन शासकों का शासन था। प्रधानमंत्री ने इतिहास को सरल और रोचक तरीके से नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले इस प्रयास की प्रशंसा की।

स्वनिधि से महिलाओं के जीवन में बदलाव

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से आगे बढ़ रहीं महिला पथ विक्रेताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह योजना लाखों महिलाओं को अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने, आय बढ़ाने और परिवार का भविष्य बेहतर बनाने में मदद कर रही है। प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तीकरण के इस पक्ष पर अधिक चर्चा की आवश्यकता बताई।

स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने का संदेश

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में युवाओं द्वारा अपने आसपास के क्षेत्रों की सफाई और अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की स्वच्छता में भागीदारी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गांव, शहर, नदियों और तीर्थस्थलों की पहचान वहां के लोगों के व्यवहार से भी बनती है और स्वच्छता इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

फूलों के शौक ने खोले सफलता के रास्ते

नागालैंड के फेक जिले की वेसालू पुरो का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि किस तरह फूलों के प्रति उनका लगाव आगे चलकर सफल पुष्प व्यवसाय में बदल गया। स्थानीय बाजार तक सीमित उनके फूल अब दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इसे मेहनत और सही मार्गदर्शन से शौक को अवसर में बदलने का प्रेरक उदाहरण बताया।

जंगल पर निर्भरता से पर्यावरण संरक्षण तक

ओडिशा के देब्रीगढ़ क्षेत्र की मैथिली भुए की कहानी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कभी वन उपज पर निर्भर उनका जीवन अब पर्यावरण पर्यटन से जुड़ चुका है। उनका प्रयास दूसरी महिलाओं को भी वन संरक्षण और आजीविका के नए अवसरों से जोड़ रहा है।

108 देशों की छात्राओं को विज्ञान से जोड़ रहा मिशन

प्रधानमंत्री ने मिशन शक्तिसैट का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से 108 देशों की छात्राओं को उपग्रह तकनीक के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के नए क्षेत्रों को समझने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने इसे बेटियों को विज्ञान और नई तकनीक से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

एवोकाडो की खेती में किसानों के लिए नई संभावना

प्रधानमंत्री ने बदलती कृषि और बाजार की मांग का उल्लेख करते हुए एवोकाडो की बढ़ती लोकप्रियता की चर्चा की। आंध्र प्रदेश के कडपा के किसान वरदराज का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि नए प्रयोग किसानों के लिए आय और बाजार के नए रास्ते खोल सकते हैं।

महानायक उत्तम कुमार को किया याद

प्रधानमंत्री ने तीन सितंबर को महान अभिनेता उत्तम कुमार की जन्मशताब्दी का उल्लेख करते हुए भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने उत्तम कुमार के अभिनय, समर्पण और किरदारों को जीवंत करने की क्षमता की सराहना की।

त्योहारों पर ‘वोकल फॉर लोकल’ का आह्वान

आगामी जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और दीपावली की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों, प्रभावशाली व्यक्तियों और प्रसिद्ध हस्तियों से ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की अपील की।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपने आसपास ऐसे लोगों की प्रेरक कहानियां साझा करने को कहा, जो छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति का अनुभव देश के किसी दूसरे हिस्से में किसी के लिए नई प्रेरणा बन सकता है।