न्यूयॉर्क, 30 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में हरियाणा के चरखी दादरी में वर्ष 1996 में हुए विमान हादसे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद RSS के स्वयंसेवक सबसे पहले मौके पर पहुंचे और राहत एवं सेवा कार्य में जुट गए थे।

भागवत ने बताया कि 12 नवंबर 1996 को सऊदी अरब एयरलाइंस और कजाकिस्तान एयरलाइंस के विमानों की हवा में टक्कर हुई थी। दोनों विमानों में बड़ी संख्या में मुस्लिम यात्री सवार थे। उनके मुताबिक, स्वयंसेवकों ने यात्रियों की पहचान कराने, शवों को निकालने और अंतिम संस्कार की व्यवस्था में मदद की।

भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों ने यह नहीं देखा कि जिन लोगों की वे सेवा कर रहे हैं, वे किस धर्म के हैं। उन्होंने इसे संघ की सेवा और सभी को साथ लेकर चलने की सोच का उदाहरण बताया।

मुसलमानों को बाहर रखने वाला हिंदू नहीं’

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुत्व किसी को बाहर रखने वाली विचारधारा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने समाज में एकता, संवाद और मानवता को प्राथमिकता देने की बात कही।

भागवत ने यह भी कहा कि समाज में बदलाव की शुरुआत सामाजिक स्तर से होनी चाहिए और बातचीत तथा सेवा इसके महत्वपूर्ण माध्यम हैं।