नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'Ohh My Dog' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। 'OMG 2' के बाद निर्देशक अमित राय एक बार फिर सामाजिक संदेश देने वाली फिल्म लेकर आए हैं। इस बार कहानी इंसानों से ज्यादा एक वफादार कुत्ते 'ऑस्कर' के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने मालिक की तलाश में निकलता है। फिल्म भावनाओं, सामाजिक मुद्दों और इंसानियत का संदेश देती है, लेकिन इसकी लंबाई और कई समानांतर ट्रैक इसकी रफ्तार को प्रभावित करते हैं। 

यदि आप परिवार के साथ ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें इमोशन, सामाजिक संदेश और जानवरों के प्रति संवेदनशीलता हो, तो 'Ohh My Dog' आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती है।

फिल्म की कहानी: दो गुमशुदगियों से शुरू होता है सफर

फिल्म की शुरुआत रिटायर हो रहे पुलिस डॉग 'सेनापति' से होती है। इसके बाद कहानी उसके दो बच्चों ऑस्कर और मोमो पर आ जाती है, जिन्हें अलग-अलग परिवारों ने अपनाया होता है।

एक दिन मोमो अचानक लापता हो जाता है, वहीं दूसरी ओर ऑस्कर का मालिक प्रिंस भी गायब हो जाता है। इसके बाद शुरू होती है एक भावनात्मक यात्रा, जिसमें एक बच्चा अपने पालतू दोस्त को ढूंढ़ रहा है और एक कुत्ता अपने मालिक तक पहुंचने की कोशिश करता है। यही सफर धीरे-धीरे डॉग तस्करी, बाल मजदूरी, किडनी रैकेट और गरीब मजदूरों के शोषण जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों तक पहुंच जाता है।

फिल्म का सबसे बड़ा हीरो है 'ऑस्कर'

फिल्म में पंकज त्रिपाठी अपने सहज अभिनय से हमेशा की तरह प्रभावित करते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा तालियां ऑस्कर बटोर लेता है। बिना कोई संवाद बोले ऑस्कर कई ऐसे दृश्य देता है जो दर्शकों को भावुक कर देते हैं। कई जगह ऐसा महसूस होता है कि पूरी कहानी उसी के इर्द-गिर्द घूम रही है।यही वजह है कि थिएटर से बाहर निकलने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पंकज त्रिपाठी नहीं बल्कि ऑस्कर की होती है।

पंकज त्रिपाठी ने फिर जीता दिल

पंकज त्रिपाठी गांव के एक शिक्षक की भूमिका में नजर आते हैं। उनका अभिनय सधा हुआ और स्वाभाविक है। वह बिना किसी अतिरिक्त नाटकीयता के अपने किरदार को प्रभावशाली बनाते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को मजबूती देती है और भावनात्मक दृश्यों में उनका अनुभव साफ दिखाई देता है।

सहायक कलाकारों का भी शानदार प्रदर्शन

फिल्म में राजेश कुमार बिहारी पुलिस अधिकारी की भूमिका में प्रभावित करते हैं। उनका अभिनय संतुलित और विश्वसनीय लगता है। पवन मल्होत्रा कम समय के लिए स्क्रीन पर दिखाई देते हैं, लेकिन RTO अधिकारी के रूप में अपनी अलग पहचान छोड़ते हैं। बाल कलाकार माही राय का यह डेब्यू है और उन्होंने कई भावुक दृश्यों में अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि कुछ जगह उनका किरदार वास्तविकता से थोड़ा अधिक समझदार दिखता है।

निर्देशन: अमित राय की सोच सराहनीय

निर्देशक अमित राय ने केवल एक डॉग लवर फिल्म नहीं बनाई है, बल्कि जानवरों के माध्यम से समाज की कई सच्चाइयों को सामने लाने की कोशिश की है। फिल्म कहीं भी भाषण देने की कोशिश नहीं करती, बल्कि कहानी के साथ सामाजिक संदेश जोड़ती चलती है। हालांकि, कई बार कहानी अपने मुख्य ट्रैक से भटक जाती है और अलग-अलग मुद्दों पर ज्यादा समय देने के कारण गति धीमी पड़ जाती है।

फिल्म की सबसे बड़ी खूबियां

  • ऑस्कर का शानदार प्रदर्शन
  • पूरी फिल्म की जान ऑस्कर है। उसकी मासूमियत और वफादारी दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।
  • भावनात्मक कहानी
  • मालिक और पालतू जानवर के रिश्ते को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।
  • सामाजिक संदेश
  • फिल्म डॉग तस्करी, बाल मजदूरी, किडनी रैकेट और मानव संवेदनाओं जैसे विषयों को छूती है।
  • परिवार के साथ देखने योग्य

फिल्म में मनोरंजन के साथ सकारात्मक संदेश भी है, इसलिए यह फैमिली ऑडियंस के लिए उपयुक्त मानी जा सकती है।

क्या कमियां हैं?

  • फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी लंबाई है।
  • कई बार कहानी मुख्य ट्रैक छोड़कर अन्य सामाजिक मुद्दों की ओर चली जाती है, जिससे भावनात्मक प्रभाव थोड़ा कमजोर पड़ता है।
  • क्लाइमैक्स भी जितना रोमांचक हो सकता था, उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाता।
  • कुछ दृश्यों में बाल कलाकार का किरदार जरूरत से ज्यादा समझदार दिखता है, जो थोड़ा अवास्तविक लगता है।

सिनेमैटोग्राफी और संगीत

  • बिहार और असम की लोकेशन फिल्म को वास्तविकता के करीब ले जाती हैं।
  • ग्रामीण परिवेश, सड़कें और प्राकृतिक दृश्य कहानी को विश्वसनीय बनाते हैं।
  • बैकग्राउंड म्यूजिक भावनात्मक दृश्यों को मजबूत करता है, लेकिन कोई भी गाना ऐसा नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए।

फिल्म क्यों देखें?

यदि आपको इमोशनल ड्रामापारिवारिक फिल्मेंजानवरों पर आधारित कहानियां और सामाजिक संदेश देने वाली फिल्में पसंद हैं, तो 'Ohh My Dog' एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।

यह फिल्म मनोरंजन के साथ इंसान और जानवर के रिश्ते की गहराई भी दिखाती है।

रेटिंग: 3.5/5

⭐⭐⭐⭐☆ (3.5/5)

  • क्या देखें?
    ✔ भावनात्मक कहानी
    ✔ शानदार अभिनय
    ✔ ऑस्कर का बेहतरीन स्क्रीन प्रेजेंस
    ✔ परिवार के साथ देखने योग्य

  • क्या खटकता है?
    ✖ फिल्म की लंबाई
    ✖ कुछ हिस्सों में धीमी रफ्तार
    ✖ कई सामाजिक मुद्दों के कारण कहानी का बिखराव