रक्षाबंधन की बदलती तस्वीर में आज आकर्षक पैकिंग है, नए स्वाद हैं और उपहार देने के नए तरीके भी हैं, लेकिन इस पूरे बदलाव के बीच एक भावना वैसी ही है जैसी पीढ़ियों पहले थी—बहन के हाथ में राखी, भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र, चेहरे पर मुस्कान और रिश्ते की खुशी को पूरा करती मिठाई की मिठास। बसंत बहार इसी पारंपरिक मिठास को नए दौर की पसंद और शुद्धता के भरोसे के साथ परोसने की है तैयारी में 


वाराणसी। कलाई पर सजी राखी केवल एक धागा नहीं होती। उसमें भाई-बहन के बचपन की स्मृतियां, नोकझोंक, स्नेह, विश्वास और जीवनभर एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का मौन वचन बंधा होता है। इस रिश्ते की खुशी जब मिठाई के एक टुकड़े के साथ साझा होती है तो रक्षाबंधन की परंपरा पूरी होती है। शायद इसीलिए समय के साथ त्योहार मनाने के तौर-तरीके बदले, बाजार बदले और मिठाइयों के स्वाद में भी नए प्रयोग हुए, लेकिन राखी और मिठास का रिश्ता आज भी उतना ही गहरा है।

रक्षाबंधन की आहट के साथ काशी के बाजारों में भी यही मिठास उतरने लगी है। कहीं काजू कतली की परतें सज रही हैं तो कहीं मोतीचूर के लड्डुओं की खुशबू लोगों को आकर्षित कर रही है। इस उत्सवी हलचल के बीच लहुराबीर चौराहा स्थित बसंत बहार ने इस बार 50 से अधिक प्रकार की मिठाइयों के साथ विशेष तैयारी की है। देसी घी की पारंपरिक मिठाइयों से लेकर काजू-अंजीर और मेवों के नए स्वाद तथा आकर्षक उपहार पैक तक—एक ही छत के नीचे कई पीढ़ियों की पसंद को समेटने का प्रयास किया गया है।

लेकिन त्योहार के बाजार में स्वाद जितना महत्वपूर्ण है, उससे बड़ा सवाल शुद्धता और भरोसे का है। बढ़ती मांग के बीच गुणवत्ता कैसे कायम रखी जाए? नई पीढ़ी की पसंद ने मिठाइयों का बाजार कितना बदला है? क्या काजू कतली और लड्डू जैसे पारंपरिक स्वाद आज भी अपनी जगह बनाए हुए हैं? उपहार के बदलते चलन ने मिठाई कारोबार को किस तरह प्रभावित किया है? इन्हीं पहलुओं पर बसंत बहार के संचालक शुभम यादव से ‘परफेक्ट मिशन’ के प्रतिनिधि ने बात की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश—

बाजार में नए स्वाद की दस्तक, लेकिन परंपरा की मिठास आज भी बेमिसाल

शुभम यादव बताते हैं कि मिठाइयों का बाजार तेजी से बदल रहा है। नई पीढ़ी चॉकलेट और फलों के स्वाद वाली मिठाइयों की ओर आकर्षित हो रही है, लेकिन रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक पर्व पर पुरानी मिठाइयों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। मोतीचूर और बेसन के लड्डू, बूंदी लड्डू, मिल्क केक, सोहन पापड़ी और पतीसा आज भी परिवारों की पसंद में मजबूती से बने हुए हैं। यही वजह है कि इस बार बसंत बहार ने आधुनिक स्वाद को अपनाते हुए भी पारंपरिक मिठाइयों को अपनी तैयारियों के केंद्र में रखा है।

काजू कतली का जलवा बरकरार, अंजीर और मेवों के स्वाद ने बढ़ाई पसंद

रक्षाबंधन की मिठाइयों की बात हो और काजू कतली का जिक्र न आए, यह संभव नहीं। शुभम के अनुसार इस बार भी सबसे अधिक मांग काजू से तैयार मिठाइयों की है। काजू कतली के साथ काजू रोल, काजू पिस्ता रोल, काजू पिस्ता बर्फी, अंजीर कतली, मेवा लड्डू और चॉकलेट काजू कतली को विशेष रूप से तैयार किया गया है। उनका कहना है कि ग्राहक अब एक डिब्बे में अलग-अलग स्वाद पसंद कर रहे हैं, इसलिए मिठाइयों की विविधता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

50 से अधिक स्वादों में सजी रक्षाबंधन की थाली

बसंत बहार में इस बार रक्षाबंधन को ध्यान में रखते हुए 50 से अधिक प्रकार की मिठाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। काजू और मेवों की मिठाइयों के साथ पारंपरिक स्वाद की पूरी श्रृंखला तैयार की गई है। शुभम यादव कहते हैं कि प्रयास यह है कि दुकान पर आने वाला ग्राहक अपनी उम्र, पसंद और बजट के अनुरूप मिठाई चुन सके। कोई पारंपरिक लड्डू पसंद करता है तो किसी की पहली पसंद काजू कतली है। परिवार के बच्चों के लिए चॉकलेट बर्फी और पाइनएप्पल बर्फी जैसे विकल्प भी रखे गए हैं।

रसगुल्ले से रसमलाई तक, बंगाली मिठास की भी अपनी दीवानगी

बनारसी स्वाद के बीच बंगाली मिठाइयों की लोकप्रियता भी लगातार बनी हुई है। रसगुल्ला, राजभोग, चमचम, रसमलाई और केसर बाटी को रक्षाबंधन के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। शुभम के अनुसार त्योहारों पर ग्राहक अब केवल एक तरह की मिठाई का डिब्बा लेने के बजाय अलग-अलग स्वाद का चयन करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि पारंपरिक और बंगाली मिठाइयों के साथ नए स्वाद को भी बराबर जगह दी गई है।

भीड़ बढ़े या मांग, शुद्धता से समझौता नहीं

त्योहार के समय मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है और इसी के साथ ग्राहकों के मन में शुद्धता को लेकर सवाल भी बढ़ते हैं। शुभम यादव इस चुनौती को कारोबार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं। उनका कहना है कि मिठाइयों में शुद्ध देसी घी, गुणवत्तापूर्ण मावा और अच्छे मेवों के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मांग बढ़ने का अर्थ गुणवत्ता के मानकों को बदलना नहीं हो सकता। उनके शब्दों में, “ग्राहकों का विश्वास ही हमारी पूंजी है। त्योहार कुछ दिनों का होता है, लेकिन ग्राहक का भरोसा वर्षों में बनता है। हम उस भरोसे से समझौता नहीं कर सकते। रक्षाबंधन पर हमारी कोशिश है कि हर डिब्बे में ग्राहक को स्वाद के साथ शुद्धता का भरोसा भी मिले।”

मिठाई का डिब्बा अब सिर्फ स्वाद नहीं, रिश्तों का खूबसूरत उपहार भी

रक्षाबंधन पर उपहार देने की परंपरा में आए बदलाव को देखते हुए बसंत बहार ने इस बार 250 ग्राम से लेकर दो किलो तक के विशेष उपहार पैक तैयार किए हैं। इनमें काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश के साथ चुनिंदा मिठाइयों को शामिल किया गया है। शुभम बताते हैं कि अब ग्राहक स्वाद के साथ पैकिंग को भी महत्व देता है। भाई या बहन को दिया जाने वाला उपहार ऐसा हो, जिसे देखते ही पर्व की विशेषता महसूस हो—इसी सोच के साथ पैक तैयार किए गए हैं।

बदलती पीढ़ी ने मिठाई को दिए नए रंग और नए स्वाद

चॉकलेट बर्फी और पाइनएप्पल बर्फी जैसी मिठाइयों की बढ़ती मांग को शुभम नई पीढ़ी की बदलती पसंद से जोड़ते हैं। उनका मानना है कि मिठाई कारोबार में परंपरा को बचाए रखते हुए नए प्रयोग भी जरूरी हैं। बच्चे और युवा अलग स्वाद चाहते हैं, जबकि परिवार के बुजुर्ग पारंपरिक मिठाइयों को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में चुनौती किसी एक स्वाद को आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि एक ही जगह तीन पीढ़ियों की पसंद को साथ लेकर चलने की है।

मिठास के बीच चटपटे बनारसी स्वाद की भी खास जगह

त्योहार की मेज केवल मिठाइयों से पूरी नहीं होती। मेहमानों के स्वागत में नमकीन और चटपटे व्यंजनों की भी अपनी जगह है। इसी को देखते हुए काजू मिक्स, दालमोट, हींग भुजिया, मटर चूड़ा, खट्टा-मीठा मिश्रण और विशेष बनारसी चटपटी मठरी सहित कई तरह के नमकीन तैयार किए गए हैं। इसके अलावा समोसा, कचौड़ी और पनीर पफ जैसे व्यंजन भी उपलब्ध हैं। शुभम के अनुसार नमकीन तैयार करने में शुद्ध मूंगफली तेल का इस्तेमाल किया जाता है और मसालों के तीखेपन को संतुलित रखने पर विशेष ध्यान रहता है।

एक छत के नीचे त्योहार का पूरा स्वाद, यही है तैयारी के पीछे सोच

शुभम यादव कहते हैं कि आज ग्राहक के पास समय कम है और अपेक्षाएं अधिक। वह चाहता है कि परिवार के लिए मिठाई, मेहमानों के लिए नमकीन और भाई-बहन के लिए आकर्षक उपहार—सब कुछ एक ही जगह मिल जाए। इसी सोच के साथ मिठाई और नमकीन की विविधता बढ़ाई गई है। रक्षाबंधन को लेकर अग्रिम बुकिंग भी शुरू कर दी गई है, जिससे अंतिम समय की भीड़ के बावजूद ग्राहकों को उनकी पसंद की मिठाई उपलब्ध कराई जा सके।

उनका कहना है, “हम चाहते हैं कि ग्राहक जब बसंत बहार आए तो उसे मिठाई और नमकीन के लिए दूसरी जगह जाने की जरूरत न पड़े। परिवार के हर सदस्य की पसंद और त्योहार की हर जरूरत एक ही छत के नीचे पूरी हो—यही हमारी कोशिश है।”

स्वाद पहली पहचान, भरोसा सबसे बड़ी विरासत

बातचीत में शुभम यादव बार-बार जिस एक शब्द पर लौटते हैं, वह है—विश्वास। उनके मुताबिक मिठाई का स्वाद किसी ग्राहक को पहली बार प्रतिष्ठान तक ला सकता है, लेकिन वर्षों तक उससे जोड़े रखने के लिए शुद्धता और गुणवत्ता जरूरी है। त्योहार के दिनों में बिक्री और मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है, मगर किसी प्रतिष्ठान की वास्तविक कसौटी यही है कि बढ़ती भीड़ के बीच भी उसके स्वाद और गुणवत्ता में अंतर न आए।