वाराणसी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सामने घाट स्थित श्री रामेश्वर मनोकामना महादेव मंदिर एवं श्री कुल पीठ धाम में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से देर रात तक चले धार्मिक कार्यक्रमों में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिर परिसर में अखंड श्रीरामायण पाठ, गुरु पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन संध्या और विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
गुरु पूर्णिमा भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इसी अवसर पर श्री कुल पीठ धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और गुरु चरणों में पुष्प, वस्त्र एवं श्रद्धा अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे परिसर में "जय गुरुदेव" और "हरि नाम" के जयघोष लगातार गूंजते रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व निर्धारित अखंड श्रीरामायण पाठ के पूर्णाहुति समारोह से हुई। वैदिक आचार्यों द्वारा विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया गया। इसके बाद श्री कुल पीठाधीश्वर परम पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिंद्रनाथ जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक होते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य सच्चे ज्ञान, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक उन्नति को प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने अपने प्रवचन में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में भी समाज को संस्कारवान बनाने के लिए गुरु की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सत्य, सेवा, सदाचार और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। दूर-दराज के जिलों से आए भक्तों ने गुरु पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना की। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की भी बड़ी संख्या कार्यक्रम में मौजूद रही।
संध्या समय आयोजित भव्य भजन संध्या कार्यक्रम इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। विभिन्न भजन मंडलियों ने गुरु महिमा, भगवान श्रीराम, शिव एवं कृष्ण भक्ति से जुड़े भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। भक्ति संगीत पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो गया।
इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे की व्यवस्था में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य संभाला। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, स्वच्छता और सुव्यवस्थित व्यवस्था देखने को मिली।
आयोजकों ने बताया कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। इस दिन गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन को सकारात्मक दिशा देने का संकल्प लिया जाता है। श्री कुल पीठ धाम में प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
गुरु पूर्णिमा का यह भव्य आयोजन वाराणसी में आस्था, सेवा और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत उदाहरण बन गया। देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
Comments (0)