वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सुपोषित भारत’ के विजन के तहत बुधवार को काशी से 30 दिवसीय नौवें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ हुआ। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बटन दबाकर 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान की शुरुआत की। देशभर के करीब 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।

‘हमारी आंगनवाड़ी-हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और प्रदेश की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य मौजूद रहीं। अभियान में आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण तक सीमित न रखकर बच्चों के समग्र विकास का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ संबोधन शुरू करते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा की धरती से पोषण अभियान की शुरुआत विशेष महत्व रखती है। युवा का भविष्य बचपन से तय होता है। मां स्वस्थ होगी तो बच्चा स्वस्थ होगा और वही राष्ट्र के विकास में योगदान देगा। बच्चे के शुरुआती एक हजार दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं और पोषण पर किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले आंगनवाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार की गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है। यहां बच्चों के लिए शौचालय, पेयजल और बाल वाटिका जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। गर्म पका भोजन और टीएचआर संयंत्रों से पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। इन्हें सक्षम बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत और प्रत्येक नागरिक की भी है। इस वर्ष अभियान में आहार विविधता एवं प्रोटीन युक्त भोजन, केंद्रों पर ताजा गर्म पका भोजन, सामुदायिक स्वामित्व एवं भागीदारी, पोषण एवं प्रारंभिक विकास तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को प्रमुखता दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ वंदना योजना के माध्यम से पांच करोड़ माताओं को 2100 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। बाल वाटिकाओं के बच्चों को दो पोशाक देने की मंजूरी दी गई है। बेसिक शिक्षा परिषद के माध्यम से करीब 1.60 करोड़ बच्चों को पोशाक, स्वेटर, बैग, जूते और मोजे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के तहत 40 वर्ष पुराने करीब 2100 विद्यालय भवनों के लिए भी धनराशि उपलब्ध कराई गई है।

योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तीन हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर अब 12 हजार रुपये तक किया गया है। इसके साथ पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा भी उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से पोषण माह को जनभागीदारी के अभियान में बदलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ओडिशा से आई आंगनवाड़ी सहायिका से कुपोषित बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में केंद्रों की भूमिका पर संवाद किया। इसके बाद गोरखपुर के बसियापुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से टेक होम राशन और कुपोषित बच्चों के पोषण संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि वर्ष 2018 में शुरू हुआ पोषण अभियान आज जनभागीदारी का व्यापक कार्यक्रम बन चुका है। देश के 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र स्वस्थ भारत के निर्माण में भूमिका निभा रहे हैं और दो लाख केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में विकसित किया जा रहा है। विकसित भारत के लिए बच्चों का स्वस्थ और सुपोषित होना आवश्यक है।

केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने मातृत्व अवकाश 12 से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया है। वहीं प्रदेश की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि बच्चों को पोषित किए बिना विकसित भारत की कल्पना पूरी नहीं हो सकती। तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से पोषण अभियान को घर-घर तक पहुंचाना होगा।

इससे पहले महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में मंत्री अनिल राजभर, रविन्द्र जायसवाल, डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, हंसराज विश्वकर्मा, प्रतिभा शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम व डॉ. सुनील पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।