वाराणसी। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में गुरु और शिष्य के अटूट संबंध का उत्सव है। यही भाव बुधवार को अखरी स्थित प्रसिद्ध सीएम पैलेस में आयोजित भव्य गुरु पूर्णिमा महोत्सव में देखने को मिला, जहां सुबह से ही श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं और अखिल भारतीय मानवाधिकार संगठन से जुड़े शिष्यों ने गुरु पीठाधीश्वर डॉ. चंद्र मौली गुरुजी के सान्निध्य में आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।
सुबह सात बजे से ही सीएम पैलेस परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया था। कुछ ही समय में पूरा परिसर "जय गुरुदेव" के उद्घोष, गुरु वंदना और भक्तों की आस्था से सराबोर हो उठा। अनुशासित ढंग से कतारबद्ध होकर श्रद्धालुओं ने गुरुजी के दर्शन किए, चरण वंदन किया और अपने परिवार, समाज तथा राष्ट्र के कल्याण की कामना के साथ उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर विश्वास और आत्मिक संतोष स्पष्ट रूप से झलक रहा था।
भक्ति संगीत ने रचा आध्यात्मिक वातावरण
दर्शन-पूजन के उपरांत आयोजित भव्य भजन-कीर्तन कार्यक्रम इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। कलाकारों और श्रद्धालुओं ने गुरु महिमा से ओत-प्रोत भजनों की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा परिसर भक्ति रस में डूब गया। मधुर संगीत, तालियों की गूंज और भक्तों की भावपूर्ण सहभागिता ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अनेक श्रद्धालु भजनों पर भाव-विभोर होकर झूमते दिखाई दिए।
'गुरु ही जीवन के अंधकार को प्रकाश में बदलते हैं'
कार्यक्रम के मुख्य सत्र में गुरु पीठाधीश्वर डॉ. चंद्र मौली गुरुजी ने अपने प्रेरक संबोधन में गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन की दिशा और दृष्टि देने वाला प्रकाश स्तंभ होता है। गुरु ही अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान, सत्य और विवेक का दीप प्रज्वलित करते हैं।
उन्होंने अपने शिष्यों से समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने, जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा करने, सत्य और करुणा के मार्ग पर चलने तथा मानवता की भावना को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। गुरुजी के प्रेरक विचारों को श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से सुना और उन्हें अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
सुबह से दोपहर तक चलता रहा आध्यात्मिक अनुष्ठान
सुबह सात बजे आरंभ हुआ यह आध्यात्मिक आयोजन दोपहर तीन बजे तक निरंतर चलता रहा। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, सेवा और समर्पण की भावना विशेष रूप से दिखाई दी। स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा, जिससे हजारों लोगों की उपस्थिति के बावजूद आयोजन सुव्यवस्थित बना रहा।
महाप्रसाद में दिखी सेवा और समानता की भावना
कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे और महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने एक साथ पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया, जिससे भारतीय सनातन परंपरा में समानता, सेवा और सामूहिकता का सुंदर संदेश भी सामने आया। आयोजन समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हुए सेवा कार्यों को पूरी निष्ठा से संपन्न कराया।
हर वर्ष बढ़ रहा श्रद्धालुओं का उत्साह
आयोजकों ने बताया कि अखरी स्थित सीएम पैलेस में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन प्रतिवर्ष श्रद्धा और भव्यता के साथ किया जाता है। समय के साथ इस आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि गुरुजी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सेवा भाव से प्रेरित होकर देश के विभिन्न हिस्सों से लोग इस आयोजन में शामिल होने पहुंचते हैं।
गुरु परंपरा का जीवंत संदेश
गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। श्रद्धालु अपने साथ केवल गुरुजी का आशीर्वाद ही नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाले विचार और समाज के प्रति अपने दायित्व का नया संकल्प भी लेकर लौटे।
Comments (0)