वाराणसी /रोहनिया। यूनाइटेड यूनिवर्सिटी, प्रयागराज के 40 विद्यार्थियों के लिए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) टिकरी में पांच माह के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन एफपीओ के निदेशक अमित कुमार सिंह के मार्गदर्शन में किया गया।
मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. बी.के. मिश्रा ने पराली प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण, मृदा की उर्वरता और टिकाऊ कृषि के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसानों के बीच जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यूनाइटेड यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. नागेंद्र राय ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को कृषि प्रौद्योगिकी, बिजनेस मैनेजमेंट, सब्जी उत्पादन, ग्राफ्टिंग तकनीक, रोग एवं कीट प्रबंधन सहित आधुनिक कृषि की विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. जनार्दन यादव ने कहा कि वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है। उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने कहा कि कृषि विभाग युवाओं के कौशल विकास और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार में हरसंभव सहयोग देगा।
एफपीओ टिकरी के संरक्षक अनिल कुमार सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ते हुए उन्हें व्यवहारिक अनुभव प्रदान करना है। कार्यक्रम के समापन पर पर्यावरणविद् अनिल सिंह ने सभी प्रतिभागियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाते हुए समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
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