कई दिनों तक अनुपस्थित रहने और 12 बजे के बाद कार्यालय पहुंचने का आरोप

मेजा, प्रयागराज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रामनगर के ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम) आशीष कुमार द्विवेदी पर सरकारी कार्यों में लापरवाही, भ्रष्टाचार और आशा कार्यकर्ताओं व आम लोगों से कथित अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर जांच और बीपीएम के स्थानांतरण की मांग की गई है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बीपीएम कई-कई दिनों तक कार्यालय से अनुपस्थित रहते हैं। आरोप है कि जब वह ड्यूटी पर आते हैं तो भी अक्सर दोपहर करीब 12 बजे के बाद कार्यालय पहुंचते हैं। इससे स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े सरकारी कार्य प्रभावित होने के साथ ही आशा कार्यकर्ताओं, मरीजों और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

शिकायत में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के भुगतान, आशा वाउचर भुगतान तथा जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर कथित तौर पर मनमाने तरीके से धन लिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा सरकारी कार्य निजी व्यक्तियों से कराए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि इससे सरकारी अभिलेखों और लाभार्थियों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाओं की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।

आशा कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि स्थानीय होने का लाभ उठाकर बीपीएम द्वारा उन पर दबाव बनाया जाता है। शिकायत में उनकी करीब 12 वर्षों से एक ही स्थान पर तैनाती का उल्लेख करते हुए स्थानांतरण की मांग की गई है। साथ ही उनकी कथित आय से अधिक संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई गई है।

आशा कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज

आशा संगिनी वंदना द्विवेदी, सुशीला, शिव लली, श्वेता, राम शीला, शीला और चिंता यादव तथा आशा कार्यकर्ता वंदना, माया, मीना देवी और रेखा मौर्या ने बीपीएम पर विभिन्न आरोप लगाते हुए उनके स्थानांतरण की मांग की है। उनका कहना है कि कार्यालय में समय से उपस्थित नहीं रहने की शिकायतों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि कार्यालय आने के समय से संबंधित साक्ष्य भी मौजूद हैं।

आशा संगिनी वंदना द्विवेदी ने सवाल उठाते हुए कहा कि सीएचसी के अधीक्षक का स्थानांतरण पांच-छह महीने में हो जाता है, लेकिन बीपीएम आशीष द्विवेदी का वर्षों से स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।

मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। शिकायतकर्ताओं ने अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।