अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक 2 सितंबर 2026 को अयोध्या स्थित मणिराम दास छावनी में होगी। बैठक में राम मंदिर की प्रशासनिक और प्रबंधन व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर फैसला होने की संभावना है। सबसे महत्वपूर्ण विषय राम मंदिर ट्रस्ट के पहले स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति माना जा रहा है।
ट्रस्ट की नियमित बैठक दोपहर चार बजे शुरू होने की जानकारी है। इससे पहले एक विशेष बैठक भी हो सकती है। इसमें ट्रस्ट में रिक्त पदों को भरने के साथ ही CEO के नाम पर चर्चा की जा सकती है। CEO पद के लिए गठित तीन सदस्यीय चयन समिति ने साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर तीन नामों का पैनल तैयार किया है। अब यह पैनल ट्रस्ट के सामने रखा जाएगा। न्यासी इन तीन नामों में से किसी एक को CEO नियुक्त कर सकते हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट में पहली बार स्थायी CEO की तैयारी
राम मंदिर के निर्माण के साथ अब मंदिर की व्यवस्थाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, कर्मचारियों का प्रबंधन, दैनिक प्रशासन, सुविधाओं का संचालन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए स्थायी CEO की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर की दैनिक प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संस्थागत स्वरूप मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा कर्मचारियों से जुड़े मामलों, श्रद्धालु सुविधाओं, प्रबंधन व्यवस्था और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण किया जा सकता है।
कृष्ण मोहन महासचिव पद पर बने रहेंगे
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार डॉ. कृष्ण मोहन महासचिव पद पर बने रहेंगे। वह फिलहाल अंतरिम महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में 2 सितंबर की बैठक में महासचिव पद पर किसी नए व्यक्ति की नियुक्ति की संभावना नहीं है।
वहीं, ट्रस्ट में तीन पद रिक्त हैं। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद दो पद खाली हुए। इसके अलावा ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन से एक और पद रिक्त है। बैठक में इन तीन रिक्त पदों पर नए सदस्यों के चयन को लेकर भी चर्चा हो सकती है।
ट्रस्ट डीड और नियमावली में संशोधन पर होगा मंथन
बैठक में ट्रस्ट डीड और न्यास नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण रहेगा। इन संशोधनों के सटीक बिंदु अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि राम मंदिर की मौजूदा प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए नियमों में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
CEO की नियुक्ति के बाद उनके अधिकार और जिम्मेदारियां क्या होंगी, महासचिव की भूमिका क्या रहेगी और दोनों पदों के बीच किस तरह का समन्वय होगा, इसे स्पष्ट करने की जरूरत होगी। इसलिए नियमावली में CEO के पद को स्थायी प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा बनाने से जुड़े प्रावधान किए जा सकते हैं।
इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति, कार्यों का विभाजन, प्रशासनिक समितियों के साथ समन्वय और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों को लेकर भी नियमों में बदलाव पर विचार संभव है।
राम मंदिर में लागू हो सकता है CEO मॉडल
राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में CEO मॉडल लागू करने की तैयारी को महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। मंदिर का संचालन अब केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है। श्रद्धालुओं की सुविधाओं से लेकर सुरक्षा, साफ-सफाई, भीड़ प्रबंधन, कर्मचारियों की व्यवस्था और विभिन्न विकास कार्यों तक बड़ी संख्या में जिम्मेदारियां जुड़ चुकी हैं।
ऐसे में CEO को इन सभी व्यवस्थाओं के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि CEO के अधिकारों और जिम्मेदारियों का अंतिम स्वरूप ट्रस्ट की बैठक में लिए जाने वाले फैसलों के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति पर भी फैसला संभव
राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बैठक में अहम प्रस्ताव रखा जा सकता है। ट्रस्ट के महासचिव की अध्यक्षता में स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति गठित करने का प्रस्ताव सामने आया है।
इस समिति का उद्देश्य राम मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय पुलिस-प्रशासन के बीच सुरक्षा से जुड़े मामलों में बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा। इसमें ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ पुलिस-प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को शामिल किए जाने की संभावना है।
समिति के माध्यम से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा, भीड़ प्रबंधन, प्रमुख पर्वों और विशेष आयोजनों के दौरान सुरक्षा योजना, वीआईपी आवागमन, प्रवेश और निकास व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर समन्वय किया जा सकता है।
विशेष आयोजनों में भीड़ प्रबंधन पर रहेगा जोर
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। प्रमुख पर्वों और विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराने के लिए ट्रस्ट, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति के गठन से इन व्यवस्थाओं को एक संस्थागत रूप दिया जा सकता है। किसी आपात स्थिति में भी विभिन्न विभागों के बीच त्वरित संवाद और कार्रवाई के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
2 सितंबर की बैठक पर सभी की नजर
राम मंदिर ट्रस्ट की 2 सितंबर को होने वाली बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों की नींव रखी जा सकती है। पहले स्थायी CEO की नियुक्ति, तीन रिक्त ट्रस्टी पदों पर नए सदस्यों का चयन, ट्रस्ट डीड और न्यास नियमावली में संशोधन तथा स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति जैसे मुद्दे बैठक के केंद्र में रह सकते हैं।
हालांकि अंतिम निर्णय ट्रस्ट के न्यासियों की बैठक में लिए जाएंगे। CEO के तीन नामों के पैनल में से किसे चुना जाता है और नियमावली में कौन-कौन से बदलाव किए जाते हैं, इसका स्पष्ट चित्र बैठक के बाद ही सामने आएगा।
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