प्रयागराज। नैनी के नगर निगम में शामिल किए गए 10 नए वार्डों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगभग 273 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का शनिवार को मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परियोजना की धीमी प्रगति और मौके पर श्रमिकों की अनुपस्थिति मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अनुपस्थित एई रबन गंगवार के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि तथा स्थानांतरण की संस्तुति शासन को भेजने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने मंडलायुक्त को परियोजना का लेआउट दिखाते हुए बताया कि यमुना नदी से प्रस्तावित इनटेक वेल्स के माध्यम से पानी पाइपलाइन से वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तक लाया जाएगा। यहां पानी का उपचार करने के बाद नैनी के विस्तारित क्षेत्र के 10 वार्डों में इसकी आपूर्ति की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान मौके पर एक भी श्रमिक मौजूद नहीं मिला। श्रमिकों से संबंधित अटेंडेंस रजिस्टर भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका। संबंधित एई रबन गंगवार के अवकाश पर होने की जानकारी दी गई। उनके स्थान पर मौजूद एई भी परियोजना की प्रगति और श्रमिकों की अनुपस्थिति के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। अधिकारियों ने बताया कि रक्षाबंधन के अवकाश के कारण श्रमिक अपने घर चले गए हैं।
समीक्षा में परियोजना का अब तक महज 20 से 25 प्रतिशत कार्य पूर्ण पाया गया, जबकि इस अवधि तक करीब 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो जाना चाहिए था। परियोजना का कार्य 18 जुलाई 2024 को अवार्ड किया गया था और जुलाई 2027 तक इसे पूरा किया जाना निर्धारित है। अधिकारियों ने बताया कि कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुगलिया लिमिटेड, राजस्थान को धीमी प्रगति के कारण 17 जून 2026 को डिबार किया जा चुका है।
मंडलायुक्त ने यमुना से पानी लेने के लिए प्रस्तावित इनटेक वेल्स की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि इनका निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की अनुमति लंबित है, जबकि सिंचाई विभाग से अनुमति मिल चुकी है। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को समन्वय कर लंबित अनुमति शीघ्र प्राप्त कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद मंडलायुक्त ने लगभग 186 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 50 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निरीक्षण किया। यहां करीब 77 प्रतिशत कार्य पूर्ण मिला। परियोजना को जुलाई 2026 में पूरा किया जाना था, लेकिन विलंब के कारण अब दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष अत्यधिक बाढ़ के कारण पूरा क्षेत्र जलमग्न होने से निर्माण प्रभावित हुआ था।
मंडलायुक्त ने दोनों परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, कार्य में तेजी और गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए समयबद्ध ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए।
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