गरीबों के मसीहा और नेकदिल इंसान के रूप में थी पहचान, जनाजे में उमड़ा जनसैलाब
सकलडीहा (चंदौली)। नई बाजार, सकलडीहा निवासी हाजी डॉक्टर जलालुद्दीन साहब के इंतकाल से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। 78 वर्षीय हाजी डॉक्टर जलालुद्दीन ने 25 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित पीजीआई में अंतिम सांस ली। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों में गम का माहौल छा गया। हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोगों की आंखें नम हो गईं। क्षेत्र के लोगों ने उन्हें नेकदिल, मिलनसार और गरीबों का हमदर्द बताया।
हाजी डॉक्टर जलालुद्दीन साहब चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखते थे। दुल्हीपुर में जेडी हॉस्पिटल, नई बाजार सकलडीहा में जेडी क्लिनिक और जेडी पब्लिक स्कूल के माध्यम से उनका क्षेत्र से गहरा जुड़ाव था। इसके साथ ही वह मदरसे के कार्यों में भी योगदान देते थे। जरूरतमंदों और गरीब परिवारों की मदद के लिए हमेशा आगे रहने के कारण लोग उन्हें गरीबों का मसीहा कहते थे।
इंतकाल की खबर से बंद हुए कई बाजार
हाजी डॉक्टर जलालुद्दीन के इंतकाल की खबर फैलते ही नई बाजार और सकलडीहा क्षेत्र में मातम छा गया। उनके सम्मान में नई बाजार की कई दुकानें और मार्केट बंद रहे। उनके आवास पर खबर मिलने के बाद से ही चाहने वालों और परिचितों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। हर कोई नम आंखों से उन्हें याद करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता नजर आया।
जनाजे में उमड़ा जनसैलाब
26 अक्टूबर, सोमवार को नमाज-ए-जुहर के बाद नई बाजार, सकलडीहा में नमाज-ए-जनाजा अदा की गई। इसके बाद उन्हें वहीं सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे में चंदौली, वाराणसी समेत आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जनाजे को कंधा देने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान 'ला इलाहा इल्लल्लाह' की सदाएं गूंजती रहीं और माहौल गमगीन हो गया।
पीछे छोड़ गए भरा-पूरा परिवार
हाजी डॉक्टर जलालुद्दीन अपने पीछे चार बेटे और चार बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके बेटों में जुल्फेखार अहमद, गफ्फार अहमद, बदरे आलम और आफताब आलम शामिल हैं। परिवार नई बाजार, सकलडीहा में ही रहता है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि हाजी डॉक्टर जलालुद्दीन का जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके नेक कार्यों, गरीबों की मदद और सामाजिक योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन। अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे और उनके परिजनों को इस दुख को सहन करने की ताकत दे। आमीन।
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