वाराणसी। शिवपुर की प्राचीन रामलीला में सोमवार को जयंत नेत्रभंग, ऋषिगण मिलन तथा राम-सीता के पंचवटी में विश्राम का भावपूर्ण और आकर्षक मंचन हुआ। रामचरितमानस पर आधारित इस लीला में मनोरम दृश्यों के साथ प्रसंगों को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शक भावविभोर हो गए। अध्यक्ष अतुलेश उपाध्याय ने बताया कि शिवपुर की रामलीला अपनी प्राचीनता और पारंपरिक शैली के कारण प्रसिद्ध है। यहां का मंचन पूर्णतः रामचरितमानस पर आधारित होता है। उपाध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि रामलीला रामायण की कथा का नाट्य रूप है, जिसमें गायन, संवाद, कथावाचन और अभिनय का सुंदर समन्वय होता है। उन्होंने बताया कि यह लीला प्राचीन काल से चली आ रही है और यहां कई ग्राम सभाओं के साथ दूर-दराज से रामभक्त पहुंचते।
रामलीला की परंपरा भारत की सबसे जीवंत सांस्कृतिक और धार्मिक विरासतों में से एक मानी जाती है। एक लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, त्रेता युग में जब भगवान राम वनवास गए, तो अयोध्या के लोगों ने 14 वर्ष की वियोग अवधि राम की बाल-लीलाओं का अभिनय करके बिताई थी। भावुक भक्त इसे अनादि परंपरा मानते हैं। वर्तमान रूप मुख्यतः गोस्वामी तुलसीदास की 16वीं शताब्दी की रचना रामचरितमानस पर आधारित है, जो अवधी भाषा में लिखी गई थी, जिससे आम लोग आसानी से समझ सकें। काशी की रामलीला परंपरा विशेष रूप से समृद्ध है। रामनगर की प्रसिद्ध रामलीला 1783 में काशी नरेश उदित नारायण सिंह द्वारा शुरू की गई थी, जो 31 दिनों तक चलती है और बिना माइक तथा आधुनिक प्रभावों के पारंपरिक ढंग से मंचित होती है। शिवपुर की रामलीला 33 से 34 दिनों तक चलने वाली मानी जाती है और इसे काशी की दूसरी प्रमुख लीला के रूप में देखा जाता है। शिवपुर सहित कई अन्य स्थानों की रामलीलाएं भी इस प्राचीन परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
कोषाध्यक्ष आर्यन सिंह ने कहा कि हालांकि शिवपुर की रामलीला अपनी विशिष्टता के लिए जानी जाती है, लेकिन अयोध्या, रामनगर, बनारस, वृंदावन और अल्मोड़ा आदि की रामलीलाओं को भी विशेष महत्व दिया जाता है। रामलीला केवल नाटक नहीं, बल्कि भक्ति, नैतिक शिक्षा, सामाजिक एकता और सामुदायिक भागीदारी का सशक्त माध्यम है। इसमें जाति-धर्म का कोई भेद नहीं होता और पूरा समाज “लीला-प्रेमी” बनकर जुड़ा रहता है। आज भी गांव-कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक यह परंपरा जीवित है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है। रामलीला को सुचारु रूप से संचालित कराने में मुख्य रूप से अध्यक्ष अतुलेश उपाध्याय, उपाध्यक्ष विकास सिंह, मंत्री त्रिलोकी नाथ सेठ, उपमंत्री रोहित मौर्या, आय-व्यय निरीक्षक पृथ्वीनाथ शर्मा, सदस्य कार्य समिति शीतला उपाध्याय, दिनेश गुप्ता, रवि कपूर, कादम्बनी लॉन प्रबंधक विजय केशरी, सुधांशु पाण्डेय, बाजपेयी पान भंडार रवि बाजपेयी ‘रिंकू’, नरसिंह जायसवाल, आनंद तिवारी (संवाददाता परफेक्ट मिशन), अनिल मौर्या, राजेश वर्मा, फूलचंद मौर्या, पप्पू जायसवाल, संजय मिश्रा, मनोज केशरी के साथ शिवपुर के रामभक्तों का सहयोग रहता है।
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