वाराणसी। बनारस के स्थानीय सर्राफा व्यापार, पारंपरिक स्वर्णकारों और कारीगरों की आजीविका की रक्षा के लिए प्रस्तावित ज्वेलरी एग्जीबिशन के विरोध में व्यापारी एवं कारीगर लामबंद हैं। उनका कहना है कि एग्जीबिशन में स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को पर्याप्त अवसर, प्राथमिकता और पारदर्शी व्यापारिक व्यवस्था मिलनी चाहिए। व्यापारियों ने खरीद-बिक्री के नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

व्यापारियों का कहना है कि सोने की खरीदारी को लेकर प्रधानमंत्री की अपील के बाद कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच स्थानीय सर्राफा बाजार को सुरक्षित रखना जरूरी है। उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबार और कारीगरों की रोजी-रोटी बचाने के उद्देश्य से है।

अभियान का नेतृत्व नवनीत सर्राफ, किशन सेठ स्वर्णकार, शुभम सेठ ‘गोलू’, अमन सर्राफ और सूरज दयाल सेठ कर रहे हैं। इसे काशी सर्राफा मंडल, उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ और सोनार नरहरी सेना का समर्थन प्राप्त है।

व्यापारियों ने बताया कि वे जल्द ही जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर स्थानीय व्यापारियों एवं कारीगरों के हितों की रक्षा की मांग करेंगे। जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को प्रदेश सरकार के समक्ष भी उठाया जाएगा। उनका कहना है कि बनारस की सर्राफा मंडी सदियों पुरानी व्यापारिक विरासत है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसकी पहचान और कारीगरों के हितों की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।